नमो भगवते वासुदेवाय | सतयुग का प्रधान तीर्थ अधिकृत टूरिस्ट गाइड उ. प्र. पर्यटन विभाग
सतयुग का प्रधान तीर्थ

नैमिषारण्य तपोभूमि वेद, शास्त्र एवं पुराणों की आधारभूमि

“प्रथमं नैमिषं पुण्यं, चक्रतीर्थं च पुष्करम्। अन्येषां चैव तीर्थानां संख्या नास्ति महीतले॥”

देवी भागवत पुराण

88,000 ऋषियों की पावन ज्ञानभूमि • चक्रतीर्थ एवं मां ललिता देवी शक्तिपीठ 108 धाम

प्रमुख दर्शन स्थल (क्लिक करके फोटो बदलें):
पौराणिक महात्म्य

नैमिषारण्य तपोभूमि का आध्यात्मिक गौरव

वेद, शास्त्र, पुराणों की आधारभूमि — सतयुग के प्रधान तीर्थ का दिव्य इतिहास एवं पौराणिक प्रमाण

सतयुग का प्रधान तीर्थ — तीरथवर

नैमिषारण्य तीर्थ युग परंपरा के अनुसार सतयुग के प्रधान तीर्थ के रूप में जाना जाता है। इस पावन तीर्थ का वर्णन समस्त 18 पुराणों में प्राप्त होता है। अखिल विश्व में कल्याणकारी श्री सत्यनारायण व्रत कथा का प्रारंभ इसी नैमिषारण्य की पावन भूमि से ही हुआ था, जिसका प्रत्यक्ष वर्णन स्कंद पुराण के रेवा खंड में प्राप्त होता है।

“प्रथमं नैमिषं पुण्यं, चक्रतीर्थं च पुष्करम्।
अन्येषां चैव तीर्थानां संख्या नास्ति महीतले॥”

— देवी भागवत पुराण

“महर्षि तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में नैमिषारण्य तीर्थ को ‘तीरथवर’ के नाम से संबोधित किया है। इसी भूमि पर सृष्टि के प्रथम पुरुष और स्त्री राजा मनु एवं रानी शतरूपा ने 23,000 वर्ष तपस्या करके इसी भूमि के आशीर्वाद से अगले जन्म में राजा दशरथ व रानी कौशल्या बनकर भगवान को पुत्र रूप में प्राप्त किया था।”

वही इस पुनीत तीर्थ पर पितृकार्यों का विशेष फल प्राप्त होता है। सनातन गया क्षेत्र में चरण गया (गया जी, बिहार), कपाल गया (बद्रीनाथ, उत्तराखंड) एवं नाभि गया (नैमिषारण्य, उत्तर प्रदेश) की त्रिवेणी मान्यता है। नैमिषारण्य को पावन ‘नाभि गया’ क्षेत्र के रूप में पूजा जाता है। ऐसी दृढ़ मान्यता है कि नैमिषारण्य तीर्थ की चौरासी (84) कोस की परिधि में सभी 33 कोटि देव और साढ़े तीन करोड़ तीर्थों का वास है।

क्यों पड़ा नैमिषारण्य नाम?

श्रीमद्भागवत पुराण, शिवपुराण, एवं कूर्मपुराण के अनुसार मान्यता है कि एक बार सभी ऋषि-मुनियों एवं देवताओं ने भगवान ब्रह्मा जी के पास जाकर पृथ्वी की सर्वश्रेष्ठ तपोभूमि के बारे में प्रश्न किया।

सभी के निवेदन को स्वीकार करते हुए ब्रह्मा जी ने अपने हृदय से एक दिव्य चक्र उत्पन्न किया, जिसको ‘ब्रह्ममनोमय चक्र’ के नाम से जाना गया। ब्रह्मा जी ने आदेश दिया कि यह चक्र वायु मार्ग से पृथ्वी का भ्रमण करेगा और जहाँ कहीं भी यह चक्र भूमि को स्पर्श करेगा, वह भूमि तपस्या के लिए सर्वोत्तम होगी।

नैमि + अरण्य = नैमिषारण्य: इसमें ‘नैमि’ से तात्पर्य चक्र की धुरी से है, जबकि ‘अरण्य’ की मान्यता दिव्य वन के रूप में है। वहीं विष्णु पुराण में सुदर्शन चक्र तथा भगवान विष्णु द्वारा निमिष मात्र समय में दुर्जय राक्षस के वध के कारण भी इस पावन भूमि को नैमिषारण्य कहा जाता है।
पौराणिक तीर्थ दर्शन

प्रमुख दर्शनीय स्थल

नैमिषारण्य तपोभूमि के समस्त 19 अति पावन एवं सिद्ध मंदिरों, तीर्थों व तपस्थलों का संपूर्ण परिचय

अधिष्ठात्र देव चक्रतीर्थ कुंड
1. चक्रतीर्थ (Chakra Tirtha)

ब्रह्ममनोमय चक्र का उद्गम स्थल

यह नैमिषारण्य तीर्थ के अधिष्ठात्र देव हैं। यहीं पर ब्रह्मा जी का ब्रह्ममनोमय चक्र पृथ्वी पर प्राप्त हुआ था। वहीं भगवान विष्णु द्वारा निमिष मात्र समय में दुर्जय नाम के राक्षस का वध किए जाने के कारण निमिष और अरण्य के रूप में नैमिषारण्य तीर्थ की सर्वोच्च मान्यता है।

पावन स्नान एवं तर्पण केंद्र स्थल
108 शक्तिपीठ मां ललिता देवी शक्तिपीठ 108
2. मां ललिता देवी शक्तिपीठ 108

लिंगधारिणी मां ललिता देवी

मां ललिता देवी शक्तिपीठ 108 आदिशक्ति के पवित्र 108 शक्तिपीठों में से एक है। यहाँ आदि शक्ति लिंगधारिणी माँ ललिता देवी के रूप में प्रतिष्ठित हैं। यहाँ शक्ति आराधना के पावन अवसर वासंतिक व शारदीय नवरात्र, गुप्त नवरात्र व अन्य महत्वपूर्ण धार्मिक संयोग पर श्री दुर्गा सप्तशती पाठ, देवी को समर्पित समस्त अनुष्ठान, श्रृंगार, हवन का आयोजन करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। सामान्य दिवस में मंदिर कपाट दोपहर 12 से 12:30 बजे तक बंद रहते हैं।

कपाट बंद: दोपहर 12 से 12:30 (सामान्य दिवस) अखंड ज्योति सिद्ध 108 शक्तिपीठ
तीर्थ के कोतवाल भूतेश्वर नाथ महादेव
3. भूतेश्वर नाथ महादेव

तीनों पहर में अलग-अलग दिव्य स्वरूप

यह प्राचीन मंदिर चक्रतीर्थ प्रांगण पर ही स्थित है। भगवान भूतेश्वर नाथ नैमिषारण्य तीर्थ के कोतवाल (रक्षक) कहे जाते हैं। दिन के तीनों पहर (सुबह, दोपहर, संध्या) में भगवान भूतेश्वर नाथ के अलग-अलग अलौकिक स्वरूप के दर्शन प्राप्त होते हैं।

रक्षक कोतवाल चक्रतीर्थ प्रांगण
तीर्थवासियों के कुलदेवता श्री काशी विश्वनाथ - विश्वेश्वर महादेव
4. श्री काशी विश्वनाथ - विश्वेश्वर महादेव

नैमिष में साक्षात काशी तीर्थ व काशीकुंड

नैमिषारण्य में भगवान शिव की प्रसिद्ध नगरी काशी स्वयं विराजित है। जब महर्षि दधीचि ने अस्थि दान से पूर्व सभी तीर्थों के दर्शन की इच्छा जताई, तब इंद्र के निमंत्रण पर साक्षात काशी विश्वनाथ जी यहाँ पधारे। शिवपुराण के अनुसार यहाँ धर्मराज की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान ने विश्वेश्वर स्वरूप में दर्शन दिया। पास ही काशीकुंड, माँ अन्नपूर्णा मंदिर व परमसंत आपानारायण स्वामी का समाधिस्थल है।

बनारस तुल्य पुण्य काशीकुंड व अन्नपूर्णा
दक्षिण भारतीय परंपरा बालाजी मंदिर नैमिषारण्य
5. बालाजी मंदिर (Balaji Mandir)

भगवान वेंकटेश्वर तिरुपति बालाजी स्वरूप

यह दक्षिण भारतीय वास्तु एवं पूजा परंपरा का भव्य मंदिर है, जहाँ आंध्र प्रदेश के तिरुपति बालाजी मंदिर की तरह ही भगवान बालाजी के अति मनोहारी स्वरूप के दर्शन होते हैं।

द्रविड़ वास्तुकला वेंकटेश्वर दर्शन
श्री राम-लक्ष्मण दर्शन • दक्षिण मुखी हनुमान गढ़ी दक्षिण मुखी श्री राम-लक्ष्मण दर्शन
6. हनुमान गढ़ी (Hanuman Garhi)

दाएं कंधे राम, बाएं लक्ष्मण जी का पावन दर्शन

यहाँ त्रेता युग की दक्षिणमुखी श्री हनुमान जी की पावन स्वयंभू प्रतिमा विराजमान है। पाताल लोक से अहिरावण का वध कर प्रभु श्री राम व लक्ष्मण जी को मुक्त कराकर लाते समय पवनपुत्र के दाएं कंधे पर श्री राम व बाएं कंधे पर लक्ष्मण जी विराजमान हैं। यहां हनुमान जी के साथ प्रभु श्री राम और लक्ष्मण जी के दर्शन से सभी प्रकार के कष्ट , संकट व ग्रहजनित दोष दूर होते हैं।

श्री राम-लक्ष्मण दर्शन दक्षिण मुखी संकट मोचन
महाभारत कालीन पांच पांडव किला
7. पांच पांडव किला (Panch Pandav Qila)

पांडवों का अज्ञातवास स्थल

महाभारत काल में अपने अज्ञातवास के दौरान पांचों पांडव नैमिषारण्य तीर्थ आए थे और यहाँ समय व्यतीत किया था। इस पौराणिक मंदिर में पांचों पांडव, महारानी द्रौपदी और योगेश्वर भगवान श्री कृष्ण जी के साक्षात दर्शन हैं।

ऐतिहासिक किला पांडव व श्री कृष्ण
वेद-पुराण पीठ पुराण मंदिर शुकदेव स्वामी
8. पुराण मंदिर (शुकदेव स्वामी)

चार वेद एवं 18 पुराणों के प्रत्यक्ष दर्शन

इस दिव्य मंदिर में पुराण पुरुष स्वरूप ब्रह्मज्ञानी भगवान शुकदेव जी महाराज के दर्शन हैं, साथ ही यहाँ चारों वेदों और समस्त 18 महापुराणों के स्वरूप के एक ही स्थान पर दर्शन प्राप्त होते हैं।

18 पुराण शुकदेव जी
रचना स्थली व्यास गद्दी नैमिषारण्य
9. व्यास गद्दी (Vyas Gaddi)

4 वेद, 6 शास्त्र व 18 पुराणों का प्राकट्य

इस पौराणिक स्थल पर महर्षि वेदव्यास जी ने बैठकर 4 वेद, 6 शास्त्र एवं 18 पुराणों की कथा शौनकादि 88,000 ऋषियों को सुनाई थी। मान्यता है कि महर्षि वेदव्यास जी ने इसी पावन स्थल पर इन समस्त वैदिक ग्रंथों की रचना भी की थी।

ज्ञान पीठ प्राचीन वट वृक्ष
सर्वसिद्धिदायक यज्ञशाला सर्वसिद्धिदायक यज्ञशाला
10. यज्ञशाला - यज्ञकुण्डम् (Yagyashala)

88,000 ऋषियों की सर्वसिद्धिदायक यज्ञशाला

यह शौनकादि 88,000 महर्षियों की पावन सर्वसिद्धिदायक यज्ञशाला एवं प्रधान यज्ञकुंड है। यहाँ श्री शंकर जी महाराज की छत्रछाया में निरंतर अखंड वैदिक यज्ञ, आहुतियां एवं श्री पितृ महायज्ञ अनुष्ठान संपन्न होते हैं।

सर्वसिद्धिदायक यज्ञशाला 88,000 ऋषियों की वेदी
6000 वर्ष प्राचीन अक्षयवट जैमिनी ऋषि तपस्थल
11. अक्षयवट (जैमिनी ऋषि तपस्थल)

व्यास शिष्य जैमिनी जी का तपोवृक्ष

यह पावन बरगद का पेड़ लगभग 6,000 वर्ष प्राचीन है। इस वृक्ष की छाया तले महर्षि वेदव्यास जी के परम मेधावी शिष्य जैमिनी ऋषि ने घोर तपस्या करके मीमांसा दर्शन को गति प्रदान की थी।

कल्पवृक्ष तुल्य 6000 वर्ष
ब्रह्मा-विष्णु-महेश त्रिदेव चरण दर्शन स्थल
12. त्रिदेव चरण दर्शन स्थल

त्रिदेव चरण पादुका (इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन, न्यूट्रॉन विज्ञान पीठ)

इस पावन स्थल पर ब्रह्मा, विष्णु और महेश के दिव्य चरण चिन्ह प्रतिष्ठित हैं। महर्षि वेदव्यास के तपोवन क्षेत्र में इन पावन त्रिदेव चरणों को सृष्टि के मूल तत्त्वों (इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन, न्यूट्रॉन) के आध्यात्मिक-वैज्ञानिक स्वरूप के रूप में प्रतिष्ठापित व पूजित किया गया है।

पावन चरण पादुका आध्यात्मिक-विज्ञान पीठ
सृष्टि के प्रथम दंपति मनु शतरूपा तपस्थानम्
13. मनु शतरूपा तपस्थानम्

23,000 वर्ष की कठोर तपस्थली

यह वह दिव्य स्थल है जहाँ सृष्टि के प्रथम दंपति स्वयंभू मनु एवं शतरूपा ने जल और वायु का आहार करते हुए 23,000 वर्ष तक अखंड तपस्या कर निराकार ब्रह्म को अपने पुत्र के रूप में साकार रूप में प्राप्त किया था।

परम तपोभूमि दशरथ-कौशल्या पूर्वजन्म
50 फीट विशाल प्रतिमाएं त्रिशक्ति मन्दिर नैमिषारण्य
14. त्रिशक्ति मन्दिर (श्री विष्णु व श्री दुर्गा)

विशाल विग्रह एवं 10 महाविद्या दर्शन

यह दक्षिण भारतीय परंपरा का एक अत्यंत भव्य मंदिर है। यहाँ पर लगभग 50 फीट की श्री हरि विष्णु जी की तथा लगभग 50 फीट की आदिशक्ति माँ दुर्गा की भव्य प्रतिमाएं हैं, साथ ही समस्त 10 महाविद्याओं के भी दर्शन होते हैं।

50 फीट प्रतिमा 10 महाविद्या
कथा व्यास पीठ सूतगद्दी नैमिषारण्य
15. सूतगद्दी (Soot Gaddi)

88,000 ऋषियों की पुराण सभा

यह वह परम पुनीत स्थल है जहाँ महर्षि सूत जी ने शौनकादि 88,000 ऋषियों को 4 वेद, 6 शास्त्र और 18 पुराणों की पावन कथा सुनाई थी। यह धर्मस्थल प्राचीन संत समागम स्थल के रूप में भी जाना जाता है।

पुराण सभा श्रीमद्भागवत पीठ
वायु देव प्रतिष्ठित देवदेवेश्वर महादेव
16. देवदेवेश्वर महादेव

पवनदेव द्वारा स्थापित प्राचीन शिवलिंग

इस पावन स्थल पर भगवान वायु देव (पवनदेव) ने भगवान आशुतोष शिव की कठोर आराधना की थी। यहाँ भगवान वायुदेव द्वारा स्वयं प्रतिष्ठित अति प्राचीन एवं सिद्ध शिवलिंग के दर्शन प्राप्त होते हैं।

वायुदेव आराधना प्राचीन शिवालय
अलौकिक चमत्कार रुद्रावर्तम गोमती नदी व राजघाट
17. रुद्रावर्तम (गोमती नदी)

जल के भीतर शिव वास व फल प्रसाद चमत्कार

इस पावन स्थल पर गोमती नदी के अंदर भगवान शिव का साक्षात वास माना जाता है। यहाँ गोमती के जल में बेलपत्र, दूध व पंचफल अर्पित करने से बेलपत्र सीधा जल के भीतर समाहित होकर शिव को प्राप्त होता है, और अर्पित 5 फलों में से 1 या 2 फल प्रसाद रूप में जल के ऊपर तैरकर बाहर आ जाते हैं!

गोमती नदी दिव्य फल प्रसाद
महान अस्थि दान दधीचि कुंड मिश्रिख
18. दधीचि कुंड (मिश्रिख)

समस्त पवित्र नदियों व तीर्थों के जल का संगम

इस पवित्र कुंड में समस्त पावन नदियों, तीर्थों और सरोवरों के जल का मिश्रण है। पृथ्वी के सबसे बड़े दानी महर्षि दधीचि ने लोक कल्याण व वृत्तासुर राक्षस के वध के लिए देवराज इंद्र को इसी स्थान पर अपनी अस्थियों का महादान किया था।

अस्थि दान स्थली इंद्र का वज्र निर्माण
समस्त दोष नाशक हत्या हरण तीर्थ
19. हत्या हरण तीर्थ (Hatya Haran)

भगवान श्री राम का ब्रह्म हत्या दोष निवारण स्थल

यह तीर्थ मानव के समस्त गंभीर दोषों को भस्म करने वाला है। मान्यता है कि यहाँ स्नान करने से जीव हत्या जैसे महापाप से भी मुक्ति मिलती है। रावण वध के पश्चात भगवान श्री राम का ब्रह्म हत्या दोष यहीं दूर हुआ था। पूरे भारतवर्ष से लोग हत्या दोष निवारण के लिए यहाँ आते हैं।

ब्रह्म हत्या दोष मुक्ति सर्वपाप नाशक
पुष्टिमार्ग बैठक जी महाप्रभु वल्लभाचार्य जी की 26वीं बैठक
20. महाप्रभु वल्लभाचार्य जी की 26वीं बैठक

श्री वल्लभाचार्य जी की पावन बैठक स्थली

पुष्टिमार्ग के संस्थापक जगद्गुरु श्री वल्लभाचार्य महाप्रभु जी ने भारत परिक्रमा के समय नैमिषारण्य में पधारकर यहाँ श्रीमद्भागवत का पारायण किया था। यह पावन स्थल वल्लभ संप्रदाय की 84 बैठकों में 26वीं बैठक जी के रूप में पूरे देश में विख्यात व पूजित है।

26वीं बैठक जी पुष्टिमार्गीय तीर्थ
तीर्थ सेवा प्रभाग

हमारी प्रमुख सेवाएं

घर बैठे या प्रत्यक्ष रूप से नैमिषारण्य तपोभूमि के सिद्ध मंदिरों में वैदिक अनुष्ठान, दर्शन, आरती एवं प्रसाद का लाभ प्राप्त करें।

ऑनलाइन दर्शन

इस सेवा के माध्यम से हम आपको नैमिषारण्य तीर्थ भूमि के समस्त प्राचीन व पौराणिक स्थलों के ऑनलाइन लाइव दर्शन की विशेष सुविधा उपलब्ध कराते हैं।

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ऑनलाइन अनुष्ठान

यदि आप नैमिषारण्य तीर्थ किसी कारणवश प्रत्यक्ष नहीं आ पा रहे हैं, तो आप निश्चित सेवा का संकल्प कर तीर्थ भूमि में सुयोग्य आचार्यों द्वारा ऑनलाइन धार्मिक अनुष्ठान कराकर पुण्य व यश के भागी बन सकते हैं।

अनुष्ठान संकल्प करें

ऑनलाइन आरती

श्री चक्र तीर्थ, माँ ललिता देवी, व्यास गद्दी, हनुमान गढ़ी, काशी विश्वनाथ मंदिर, मनु शतरूपा तप स्थान, भूतेश्वर नाथ व देवदेवेश्वर महादेव की दैनिक व विशिष्ट आरती में संकल्प पूजन कर शामिल हों।

आरती संकल्प

प्रसाद सेवा (घर बैठे)

पूर्णिमा, अमावस्या, एकादशी, प्रदोष, नवरात्र, पितृपक्ष, श्रावण मास, शिवरात्रि, गुरुपूर्णिमा व अन्य महत्वपूर्ण धार्मिक संयोग पर संपन्न होने वाले विशिष्ट अनुष्ठानों का महाप्रसाद शुद्धतापूर्वक अपने घर पर प्राप्त करें।

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ऑनलाइन पितृ तर्पण व श्राद्ध

गया क्षेत्र में चरण गया (गया जी, बिहार), कपाल गया (बद्रीनाथ, उत्तराखंड) व नाभि गया (नैमिषारण्य, उत्तर प्रदेश) प्रमुख हैं। अतृप्त पितरों की आत्मशांति हेतु पूरे वर्ष सुयोग्य आचार्यों द्वारा ऑनलाइन पितृ तर्पण, श्राद्ध, त्रिपिंडी आदि वैदिक कर्म संपन्न कराए जाते हैं।

पितृ कर्म हेतु संपर्क करें

अन्नक्षेत्र / अन्नदान सेवा

नैमिषारण्य पावन तपोभूमि में संत-महात्माओं, साधु-संन्यासियों, तीर्थयात्रियों एवं जरूरतमंदों के लिए नित्य अन्नक्षेत्र (भंडारा) संचालित होता है। अपने जन्मदिन, वैवाहिक वर्षगांठ, पितरों की स्मृति अथवा विशेष पर्व पर पवित्र अन्नदान व भंडारा सेवा का संकल्प लें।

अन्नदान संकल्प करें
अधिकृत संस्था

हमारे बारे में (About Us)

परम पुण्यदायी नैमिषारण्य तीर्थ में प्रवास के उद्देश्य से वर्ष 2005 में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए "नैमिष टूरिस्ट सर्विसेज" की स्थापना की गई। हमारा उद्देश्य नैमिषारण्य तीर्थ आने वाले श्रद्धालुओं को इस पौराणिक तपोभूमि की अनकही आध्यात्मिक गरिमा से परिचित कराने के साथ ही इस पुनीत भूमि में श्रेष्ठ आचार्यों द्वारा परम पुण्यदायी धार्मिक अनुष्ठानों का लाभ प्राप्त कराना है। हमारी संस्था नैमिषारण्य तीर्थ प्रवास सहित उत्तर प्रदेश व नेपाल के लिए संपूर्ण टूर पैकेज उपलब्ध कराती है, जिसमें सुविधायुक्त कमरे, हॉल, वाहन, सात्विक भोजन व प्रशिक्षित गाइड की सेवा शामिल है।

पं पुरुषोत्तम शास्त्री

पं पुरुषोत्तम शास्त्री

संस्थापक एवं पीठाधीश
  • संस्थापक: नैमिष टूरिस्ट सर्विसेज "नैमिषारण्य प्रवासम"
  • पीठाधीश: पौराणिक काशी विश्वनाथ मंदिर "काशी क्षेत्र", नैमिषारण्य
  • अंशधारी: मां ललिता देवी शक्तिपीठ 108
  • अधिकृत टूरिस्ट गाइड: उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग (UP Tourism)
सीधा संपर्क / कॉल: 09935935573 09918188484 09935010749 naimishtouristservices@gmail.com WhatsApp: 09935935573
सोशल मीडिया व यूट्यूब:
आनंद गुप्ता

आनंद गुप्ता

प्रबंधक एवं टूरिस्ट गाइड
  • प्रबंधक: नैमिष टूरिस्ट सर्विसेज "नैमिषारण्य प्रवासम"
  • अधिकृत टूरिस्ट गाइड: उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग (UP Tourism)
  • तीर्थयात्री आवास, वाहन एवं सुरक्षा व्यवस्था प्रमुख
  • बहुभाषी तीर्थ दर्शन एवं संपूर्ण यात्रा प्रबंधन
सीधा संपर्क / कॉल: 09919588884 WhatsApp: 09935935573
24x7 तीर्थयात्री सहायता एवं आवास व्यवस्था हेतु उपलब्ध।
संपूर्ण यात्रा व्यवस्था

तीर्थ सुविधाएं एवं यात्रा पैकेज

नैमिषारण्य सहित अयोध्या, काशी, प्रयागराज एवं नेपाल तक आरामदायक, सुव्यवस्थित व धार्मिक यात्रा

नैमिषारण्य यात्रा प्लान

1 दिवसीय, 2 दिवसीय एवं 84 कोसी परिक्रमा का पूर्ण व्यवस्थित तीर्थ भ्रमण कार्यक्रम।

एसी, नॉन एसी रूम एवं हॉल

नैमिषारण्य तीर्थ में स्वच्छ, आधुनिक एसी/नॉन एसी डीलक्स कमरे एवं बड़े यात्री समूहों हेतु हॉल।

एसी, नॉन एसी कार व बस सुविधा

लखनऊ, सीतापुर, कानपुर स्टेशन व एयरपोर्ट से पिकअप-ड्रॉप, सेडान, इनोवा, टेम्पो ट्रेवलर व लग्जरी बसें।

बहुभाषी गाइड सुविधा

हिंदी, अंग्रेजी, तेलगु, गुजराती आदि भाषाओं में उ.प्र. पर्यटन विभाग से अधिकृत कुशल गाइड्स।

सत्यनारायण कथा (हिंदी, अंग्रेजी, तेलगु)

उद्गम स्थल पर सुयोग्य आचार्यों द्वारा आपकी मातृभाषा (हिंदी, अंग्रेजी, तेलगु) में प्रामाणिक कथा।

अयोध्या, काशी, प्रयागराज व नेपाल टूर

उचित दर पर नैमिष दर्शन के साथ अयोध्या धाम, वाराणसी, प्रयागराज संगम व नेपाल मुक्तिनाथ पैकेज।

श्रीमद्भागवत कथा, शिवपुराण, रामकथा आदि बहुदिवसीय धार्मिक अनुष्ठान

1 दिन से अधिक अवधि वाले समस्त धार्मिक अनुष्ठानों, सप्ताह पारायण, महायज्ञों के लिए पैकेज, उच्चस्तरीय आवास, सात्विक भोजन एवं संपूर्ण वाहन व्यवस्था का एक ही स्थान पर विश्वसनीय समाधान।

नित्य मंदिर समय सारिणी

दैनिक आरती एवं दर्शन समय

मंदिरों के कपाट खुलने, भोग एवं आरती का प्रामाणिक समय। लाइव ट्रैकर वर्तमान सक्रिय आरती दर्शाता है।

नैमिषारण्य मंदिर दैनिक आरती समय

लाइव आरती लोड हो रही है...
आरती / अनुष्ठान का नाम समय प्रमुख मंदिर / स्थल श्रद्धालु सहभागिता
मंगला आरती एवं प्रातः दर्शन
Mangala Aarti & Awakening
05:00 AM - 05:45 AM मां ललिता देवी शक्तिपीठ 108, काशी विश्वनाथ व भूतेश्वर नाथ परिसर में उपस्थित होकर दर्शन व दीप प्रज्वलन
चक्रतीर्थ स्नान एवं सूर्य तर्पण
Holy Snan & Vedic Tarpan
06:00 AM - 11:45 AM चक्रतीर्थ घाट एवं परिक्रमा मार्ग सभी श्रद्धालुओं हेतु संकल्प व स्नान खुला है
मध्याह्न राजभोग आरती एवं कपाट विराम
Madhyahna Rajbhog & Rest
12:00 PM - 12:30 PM मां ललिता देवी शक्तिपीठ 108 व अन्य मंदिर ललिता देवी मंदिर सामान्य दिवस कपाट बंद दोपहर 12 से 12:30
मध्याह्न विश्राम (पट बंद)
Afternoon Rest Period
01:00 PM - 04:00 PM मंदिर कपाट बंद चक्रतीर्थ परिक्रमा क्षेत्र खुला रहता है
महा संध्या आरती एवं दीपदान
Grand Evening Aarti & Deep Daan
06:30 PM - 07:30 PM चक्रतीर्थ, गोमती घाट व काशी विश्वनाथ 108 दीपों की महाआरती में जन सहभागिता
शयन आरती एवं मंदिर समापन
Shayan Aarti & Temple Closing
08:30 PM समस्त प्रमुख मंदिर शयन आरती 8:30 शाम, अधिकतम रात्रि 9:00 बजे तक सभी मंदिर कपाट बंद
माँ ललिता देवी मंदिर: सामान्य दिवस पर दोपहर 12:00 से 12:30 बजे तक मंदिर कपाट बंद रहते हैं। श्रद्धालु इसी समयानुसार अपने दर्शन व पूजन का समय तय करें।
शयन आरती व रात्रि समापन: शयन आरती शाम 8:30 बजे होती है एवं अधिकतम रात्रि 9:00 बजे तक सभी मंदिर कपाट बंद हो जाते हैं।
परोपकाराय पुण्याय भवति • पावन सेवा संकल्प

नैमिषारण्य तीर्थ सेवा एवं दान सहयोग

88,000 ऋषियों की इस पावन तपोभूमि में अन्नदान, साधु सेवा, गौसेवा, वेद विद्यालय एवं मंदिर संरक्षण में अपनी सामर्थ्यानुसार दान देकर अक्षय पुण्य के भागी बनें।

अधिकृत ट्रस्ट बैंक खाता एवं UPI

श्री नैमिषारण्य तीर्थ सेवा ट्रस्ट (रजि.)

नैमिषारण्य तपोभूमि में संचालित नित्य अन्नक्षेत्र, गौशाला, संस्कृत विद्यार्थी सेवा एवं तीर्थ विकास हेतु आप सीधे ट्रस्ट के बैंक खाते अथवा UPI द्वारा सहयोग राशि प्रेषित कर सकते हैं।

अधिकृत बैंक खाता (Official Bank Account) (RTGS / NEFT / IMPS)
खाताधारक (Account Name): Naimish Tourist Services
बैंक का नाम (Bank): केनरा बैंक (Canara Bank)
खाता संख्या (A/C No.):
120040176715
खाता प्रकार (Account Type): चालू खाता (Current Account)
IFSC कोड:
CNRB0007928
शाखा (Branch): नीमसार (Neemsaar), नैमिषारण्य, सीतापुर (उ.प्र.)
सीधे यहीं से स्कैन या Pay करें (Instant Payment)
Naimisharanya Daan UPI QR Code
स्कैन करें: ₹1,100
आधिकारिक UPI ID:
naimishtouristservices@cnrb
राशि बदलने पर QR कोड और Pay बटन स्वतः अपडेट हो जाते हैं।

दान सहयोग पूछताछ व रसीद सहायता

09935935573 (पं पुरुषोत्तम शास्त्री) 09919588884 (आनंद गुप्ता) WhatsApp: 09935935573
प्रत्येक दान पर पावन ई-रसीद (Digital Receipt) तुरंत जारी की जाती है।

पावन दान एवं सेवा संकल्प फॉर्म

कृपया अपनी सेवा चुनें और विवरण भरें। भुगतान उपरांत UTR नंबर दर्ज करने पर रसीद तुरंत प्राप्त होगी।

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* यदि आपने ऊपर दिए QR / Bank पर भुगतान कर दिया है, तो UTR यहाँ अवश्य लिखें ताकि रसीद तुरंत सत्यापित हो सके।
आपका विवरण पूर्णतः सुरक्षित है। सबमिट करने पर आपको तुरंत डिजिटल संदर्भ रसीद प्राप्त होगी।
अधिकृत बुकिंग पोर्टल

पूजा अनुष्ठान, प्रवास व टूर पैकेज बुकिंग

उ.प्र. पर्यटन अधिकृत एवं सुयोग्य आचार्यों के मार्गदर्शन में संपूर्ण व निश्चिंत यात्रा

नैमिषारण्य प्रवासम सेवा

2005 से श्रद्धालुओं की सेवा में समर्पित। प्रामाणिक वैदिक पद्धति से पूजा-अर्चना, साफ-सुथरे एसी कमरे, सात्विक भोजन एवं विश्वसनीय वाहन व्यवस्था।

  • सुयोग्य आचार्यों द्वारा अनुष्ठान: रुद्राभिषेक, चंडी पाठ, सत्यनारायण कथा व पितृ तर्पण।
  • कमरे, हॉल व वाहन: नैमिषारण्य तीर्थ में एसी/नॉन एसी कक्ष एवं टूरिस्ट गाड़ियाँ।
  • बहुभाषी मार्गदर्शक: हिंदी, अंग्रेजी, तेलगु, गुजराती में समर्पित गाइड सेवा।
  • अयोध्या-काशी-नेपाल पैकेज: सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश व नेपाल का संयुक्त यात्रा पैकेज।

सीधा संपर्क एवं तत्काल सहायता

09935935573 09919588884 WhatsApp: 09935935573
24x7 अधिकृत तीर्थयात्री सहायता केंद्र
आपका विवरण सुरक्षित है और सीधे अधिकृत सुयोग्य आचार्यों के पास प्रेषित होगा।
यात्रा मार्गदर्शिका

नैमिषारण्य कैसे पहुंचे?

सीतापुर जिले में स्थित नैमिषारण्य रेल, वायु एवं सड़क मार्ग द्वारा देश के कोने-कोने से सुगमतापूर्वक जुड़ा हुआ है।

हवाई मार्ग (By Air)

चौधरी चरण सिंह अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, लखनऊ (LKO)

  • दूरी: 85 किमी (लगभग 2 घंटे, फोरलेन हाईवे)।
  • दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु से सीधी उड़ानें।
  • हमारी संस्था द्वारा एयरपोर्ट से सीधी एसी कैब सुविधा उपलब्ध।

रेल मार्ग (By Train)

नजदीकी रेलवे स्टेशन

  • लखनऊ रेलवे स्टेशन: 100 किलोमीटर
  • सीतापुर रेलवे स्टेशन: 36 किलोमीटर
  • हरदोई रेलवे स्टेशन: 38 किलोमीटर

सड़क मार्ग (By Road)

सुगम राष्ट्रीय राजमार्ग एवं बस सुविधा

  • लखनऊ कैसरबाग बस स्टैंड से हर आधे घंटे में सीधी बसें।
  • आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे व किसान पथ द्वारा दिल्ली से 7 घंटे।
  • संस्था द्वारा एसी बस एवं कार बुकिंग की उत्तम व्यवस्था।

प्रमुख शहरों से दूरी चार्ट

प्रारंभिक शहर दूरी अनुमानित समय उत्तम मार्ग
सीतापुर (Sitapur) 36 किमी ~45 मिनट सीतापुर - मछरेहटा - नैमिषारण्य मार्ग
हरदोई (Hardoi) 38 किमी ~50 मिनट हरदोई - बेनीगंज - नैमिषारण्य मार्ग
लखनऊ (Lucknow) 100 किमी ~2 घंटा NH-24 सीतापुर रोड / किसान पथ
कानपुर (Kanpur) 165 किमी ~3 घंटा 30 मिनट कानपुर - उन्नाव - लखनऊ आउटर रिंग रोड
अयोध्या धाम (Ayodhya) 220 किमी ~4 घंटा पूर्वांचल एक्सप्रेसवे लिंक / किसान पथ बाईपास
नई दिल्ली (New Delhi) 450 किमी ~7 घंटा यमुना / आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे
महत्वपूर्ण जिज्ञासाएं

तीर्थयात्री मार्गदर्शन एवं प्रश्नोत्तरी

नैमिषारण्य तीर्थ यात्रा, चक्रतीर्थ स्नान, पूजा संकल्प एवं प्रवास से जुड़े मुख्य प्रश्न

चक्रतीर्थ स्नान नियम

पवित्र मन से स्नान करें। घाटों पर बने पक्के सोपानों का प्रयोग करें। स्नान के समय गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र अथवा वासुदेव द्वादशाक्षर मंत्र का जप अनंत गुना पुण्य प्रदान करता है।

मंदिर वस्त्र आचार संहिता

पारंपरिक भारतीय परिधान सर्वोत्तम हैं। पुरुषों हेतु धोती-कुर्ता अथवा पायजामा-कुर्ता तथा महिलाओं हेतु साड़ी अथवा सलवार-सूट उपयुक्त हैं। गर्भगृह में चमड़े की वस्तुएं ले जाना वर्जित है।

यात्रा का सर्वोत्तम समय

अक्टूबर से मार्च का मौसम अत्यंत सुखद रहता है। विशेष धार्मिक अवसरों में सोमवती अमावस्या, चैत्र व शारदीय नवरात्र एवं फाल्गुन मास की 84 कोसी परिक्रमा प्रमुख हैं।

स्कंद पुराण के रेवा खंड के अनुसार, श्री सत्यनारायण व्रत कथा का प्रादुर्भाव इसी नैमिषारण्य तीर्थ से हुआ था, जहाँ महर्षि सूत जी ने शौनकादि 88,000 ऋषियों के कल्याण हेतु इस कथा का प्रथम वाचन किया था।
सनातन परंपरा एवं पुराणों के अनुसार तीन परम पावन गया क्षेत्र मान्य हैं—चरण गया (गया जी, बिहार), कपाल गया (बद्रीनाथ, उत्तराखंड) व नाभि गया (नैमिषारण्य, उत्तर प्रदेश)। नैमिषारण्य तीर्थ को साक्षात नाभि गया माना जाता है। यहाँ चक्रतीर्थ व पावन गोमती संगम पर पितरों के निमित्त किया गया श्राद्ध, पिंडदान, तर्पण एवं त्रिपिंडी कर्म उन्हें जन्म-मरण के बंधन से मुक्त कर सीधे मोक्ष व वैकुंठ धाम प्रदान करता है।
महर्षि दधीचि के अस्थि दान संकल्प पर इंद्र के आमंत्रण पर साक्षात बाबा काशी विश्वनाथ जी यहाँ पधारे थे। यह मंदिर तीर्थवासियों के कुलदेवता के रूप में पूजा जाता है और यहाँ पूजन से बनारस के काशी विश्वनाथ के बराबर पुण्य प्राप्त होता है।
हाँ, वर्ष 2005 से स्थापित नैमिष टूरिस्ट सर्विसेज द्वारा एसी/नॉन-एसी कमरे, हॉल, सेडान, इनोवा, टेम्पो ट्रेवलर एवं बसें, सात्विक भोजन और बहुभाषी (हिंदी, अंग्रेजी, तेलगु, गुजराती) गाइड सेवा उचित दरों पर उपलब्ध कराई जाती है।
यहाँ स्नान करने से ब्रह्म हत्या एवं जीव हत्या जैसे घोर पापों का शमन होता है। लंका विजय के बाद मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने इसी तीर्थ में स्नान कर ब्रह्म हत्या के दोष से मुक्ति पाई थी।
सीधा संपर्क

संस्था संपर्क सूत्र एवं सहायता केंद्र

नैमिष टूरिस्ट सर्विसेज "नैमिषारण्य प्रवासम" — अधिकृत टूरिस्ट गाइड उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग

अधिकृत संपर्क नंबर

पं पुरुषोत्तम शास्त्री
पं पुरुषोत्तम शास्त्री (संस्थापक)
09935935573 09918188484 09935010749
आनंद गुप्ता
आनंद गुप्ता (प्रबंधक)
09919588884 आवास, वाहन व टूर पैकेज व्यवस्था
आधिकारिक WhatsApp नंबर
+91 9935935573 24x7 WhatsApp चैट सहायता (Click to Chat)
आधिकारिक ईमेल (Email)
naimishtouristservices@gmail.com तीर्थ दर्शन, पूजन व टूर पैकेज संबंधी पूछताछ
कार्यालय का पता
नैमिष टूरिस्ट सर्विसेज "नैमिषारण्य प्रवासम",
पौराणिक काशी विश्वनाथ मंदिर प्रांगण, नैमिषारण्य,
जनपद सीतापुर, उत्तर प्रदेश - 261402
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